राजस्थान की अवस्थिति तया भौगोलिक प्रदेश
राजस्थान की अवस्थिति तया भौगोलिक प्रदेश
1) परिचय राज. भारत के उत्तर पश्चिमी भाग में स्थित स्थित है, इसकी आकृति, विषमकोणीय पर्तुभुज के समान है। km. राज का क्षेत्रफल 3,42,239 की में की दृष्टि से भारत है यह क्षेत्रफल स्थान रखता प्रथम है! इससे पूर्व भारत का सबसे बड़ा राज्य मध्यप्रदेश हुआ करता था, नवम्बर 2000 छत्तीसगढ़ राज्य अलग होने से छोटा हो गया नम्बा पर है' अब वर्तमान में पहले राज. राज्य दर्जा का 7 नव. 2000 को 'छत्तीसगढ़ राज्य अलग होने से छोटा हो गया था
के → राज. का ढाल उत्तर से दक्षिणी तथा पूर्व से पश्चिम की ओर है। .. में कर्क रेखा (23.N.) के दो फिलो से राज.. स्थित है। कर्क रेखा उत्तर
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गुजरती है (बाँसवाड़ा+दूंगाबूर) कर्क रेखा को राज: से गुजरने वाली माही नदी दो बार काटती है। )
→ राज. के मध्य भाग में उत्तर पूर्व से दक्षिण पश्चिमी की ओर अरावली पर्वत श्रृंखला का विस्तार है जो एक भारत की महान जल विभाजक रेखा भी है।
राज: भारत का सबसे बड़ा मकस्थल थार का भाग जिसका क्षेत्र फल 1,75000 की Kom है।
राजस्थान की अवस्थिति च राज. का अक्षांशीय विस्तार २३3' उत्तरी अक्षांश से 30°12' उत्तरी, अक्षाश पर स्थित है तथा दिशान्तरीय विस्तार 6930 से पूर्वी दिशान्ता से 78 17 पूर्वी दिशान्तर पर स्थित है। देशान्तरीय
'पूर्व से पश्चिम ल. 869 Km.. राज. ल्या है । (कोणा गाँव) 1 के उत्तर में भी गंगानगर जिले का हिन्दूमल कोर दक्षिण में बाँसवाड़ा जिले का बोरकुण्डा गाँव स्थित है!
पश्चिम में जैसलमेर जिले का सम (कटरागांव) तथा धौलपुर जिले का राजा खेड़ा तहसील का 1. सिलोग स्थित है।
देशान्तर → राज. की उत्तर से दक्षिण N. 826 PM तथा → 9 राज. अन्तरर्राज्यीय व सीमा बनाता है! अन्तराष्ट्रीय दोनो प्रकार थी राज. की अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पाकिस्तान के साथ लगती है। जिसकी कुल ल 1070km है, जिसक राज. के चार जिले शामिल है जो' सर्वा, सीमा जैसलमेर (464pm) तथा →
न्युतम सीमा बीकानेर 168 Rm तथा बाड़मेर 228 और गंगानगर 210km सीमा बनाता है। 4 की
अन्तर्राज्यीय सीमा राज. पांच राज्यों से बनाता 1. जिसकी ल. 4850 km है। सर्वा. लम्बी अन्तरदियीय सीमा मध्यप्रदेश (1600) तथा पंजाब (89 RM) के साथ तथा कुल अन्तरराज्यीय व अन्तरराष्ट्रीय सीमा 15920km पानाता है। → अन्तराष्ट्रीय सीमा का नाम रेडक्कि देखा है। रेडक्लिफ राज. का भौगोलिक स्वरूप तथा उच्चावच न राज. का भौगोलिक स्वरूप व उच्चावचीय स्वरूप यहाँ का भूगर्भिक संरचना द्वारा निर्धारण तथा लाखो वर्षो से हो रहे अपक्षय, अपरदन निक्षेप के परिणामस्वरूप हुआ है!, → धरातलीय चार स्वरूप की दृष्टि से राज. स्वरुपों में बाँस गया है। केस्रा निम् DATE देशान्तरीय
वि)
र
(1) (1) पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश, - (2) (1) अरावली पर्वतीय प्रदेश (3) (ii) पूर्वी मैदानी प्रदेश. (4) (४) दक्षिणी पूर्वी पठारी प्रदेश/ हाड़ौती का पठार
(1) पश्चिमी मरूस्थलीय प्रदेश ने पर्मिनियन कार्बो फेरस युग तक समुद्र का विस्तार था इसके बाद जुरेलिक तथा इसके बाद के कालो में यह राज. के. उत्तर पश्चिमी भाग शुष्क पड़ गया भाग में थार का मरूस्थल स्थित है जिसका विस्तार सफ. के 1.75000km
हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, उरु, भूंतू, सीकर, नागौर बीकानेर, जोधपुर, जैसलमैर बाड़मेर, जालौर पाली है। तथा पार
के थार मरुस्थल का विस्तार भारत में 62% है तथा थार शेष का हरियाणा 38% 6/11/ तथा पाकिस्तान में है राज, मे, तथा गुजरात भारत के पंजाब 0.89. फैल हैं।
थार का मरुस्थल
भारत 627
पाकिस्तान 38%
पंजाब, हरियाणा, गुजरात 0894
थार के मकस्थल को वर्षा या शुष्कता के आधार पर (1) अर्थशुष्क प्रदेश (ii) शुष्क प्रदेश राज. मेदो भागो मे बौरा गया है
(i) शुष्क मरुस्थलीय प्रदेश स इसका
विस्तार राज में
राज-
दक्षिणी गंगानगर पश्चिमी व दक्षिणी पश्चिमी बीकानेर जोधपुर का पा पश्चिमी में भाग बाड़मेर क्या फैसलमेर इसका विस्तार है यहाँ वार्षिक वर्षा का औसत वर्षा 10-Tocm रहती है। यहाँ कम वार्षिक वर्षा से करिती झाड़ियाँ व छोटी पति वाली घास पाई जाती हैं। DATE
→ इस शुष्क प्रदेश को भी दो भागो में बांटा गया है- बालुका मुक्त प्रदेश बालुका युक्त प्रदेश
(1) बालुका मुक्त प्रदेश न इस प्रदेश का विस्तार पोकरण (जैसलमेर), फलोदी (जोधपुर) व बलोतरा (बाड़मेर) के मध्य पाया मात्रा को जाता है, यहाँ बालुका स्तूप बहुत ही कम में देखने को मिलते है, इस कारण इस प्रदेश बालुका मुक्त प्रदेश कहा जाता है। इस क्षेत्र में हम्माद (पथरीला मकरतत) पाया जाता है।
बालुका युक्त प्रदेश न
(#) इस मरूस्थल का विस्तार लगभग सम्पूर्ण मरुस्थल में पाया जाता है, यहाँ कई प्रकार के बालुका स्तूप देखने को मिलते है तथा इसके साथ-2 यहाँ वर्ग (रेतीला मरा.) तथा रंग (मिश्रित मक.) अर्थात चहानी रेतीली दोनों प्रकार के मरुस्थल देखने को मिलते है)

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